तीजन बाई की शिष्या तरुणा साहू को मिला भगवत प्रसाद स्मृति सम्मान
पंडवानी में जीवंत हुआ द्रौपदी चीरहरण का मार्मिक प्रसंग



सुनिल योगी(विशेष रीपोर्ट)
मुंबई। प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन मंच पर शनिवार की शाम छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला पंडवानी की शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित अतिथियों एवं पत्रकारों को भाव-विभोर कर दिया। गोर तलब हे, कि 12 सितंबर शनिवार को मुंबई बोरीवली अटल सभा गृह में पी सी डब्ल्यू जे का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ इस दौरान देशभर से बड़ी संख्या में अधिवेशन कार्यक्रम स्थल पर पत्रकार उपस्थित हुए इसी दौरान पी सी डब्ल्यू जे अधिवेशन में शामिल मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथियों द्वारा छत्तीसगढ़ से जुड़ी प्रसिद्ध लोक विधा से जुड़ी पंडवानी सधिका तरुणा साहू को भागवत प्रसाद स्मृति सम्मान से सम्मानित किया विदित हो की छत्तीस गढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी शैली की साधिका तरुणा साहू जो वर्तमान में रेलवे सुरक्षा बल, राजनांदगांव में(थानाप्रभारी) इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हे । मंच पर सम्मानित लोक शैली साधिका तरुणा साहू ने आयोजन मंडल के आग्रह पर पी सी डब्ल्यू जे के मंच पर परंपरागत शैली में 30 मिनट की मनमोहन प्रस्तुति के दौरान महाभारत के मार्मिक प्रसंग ‘द्रौपदी चीरहरण’ को पंडवानी के माध्यम से जीवंत कर दिया। सुर, ताल और भाव के साथ उन्होंने इस प्रसंग को इस तरह प्रस्तुत किया कि, उपस्थित पत्रकार और सिने जगत से जुड़े एवं संगीत कला से जुड़े अतिथि भाव विभोर हो गए। हमारे संवाददाता सुनील योगी को लोक विधा शैली साधिका
तरुणा साहू ने बताया कि 10 वर्ष की उम्र में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी विधा से उनका जुड़ाव (वर्ष 1994 से) है। जवाहर नवोदय विद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्हें पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई के सानिध्य में पंडवानी सोखने का अवसर मिला। गुरु तीजन बाई के साथ उन्होंने दिल्ली, भोपाल, उज्जैन के कालिदास समारोह सहित | देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी। उनकी कल बना को वर्ष 2005 में लोक एवं पारंपरिक
कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिली। वर्ष 2024 में अयोध्या महोत्सव में पंडवानी प्रस्तुति के साथ उन्हें आइकॉनिक ऑनरेरी डॉक्टरेट अवॉर्ड और शक्ति सम्मान 2024 से भी सम्मानित किया गया। कला के साथ तरुणा साहू अपनी वर्दी की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। बच्चों के
रेस्क्यू, सुरक्षा और जनजागरूकता अभियानों में भी उनका सक्रिय योगदान रहा है। एक ओर वे पंडवानी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर वर्दी के जरिए समाज की सेवा और सुरक्षा का दायित्व निभा रही हैं। मुंबई प्रेस क्लब के मंच पर ‘द्रौपदी चीरहरण’ की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित पत्रकार सिने कलाकार एवं अतिथि
महाभारत के इस मार्मिक प्रसंग से जुड़े नजर आए। प्रस्तुति के अंत में सभी ने तालियों के साथ करुणा साहू एवं उनके शागिर्दों का उत्साह बढ़ाया। इस प्रस्तुति में बैंजो पर श्री हर्ष मेश्राम (स्वास्थ्य विभाग) और हारमोनियम पर श्री टीकाराम गेंदले (शिक्षा विभाग) ने संगत दी। इस दौरान प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट द्वारा मंच पर तरुणा साहु जी का स्वागत अभिनंदन करते हुए उन्हें भगवती प्रसाद सम्मान से सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र और सम्मान दिया गया। मंच से ही तरुण साहू ने मुंबई आयोजन समिति और सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और यह स्तंभ मजबूती के साथ आगे भी बढ़ा सकता है और इस मजबूती के साथ पीछे भी कर सकता है।
15 सितंबर को रायगढ़ में चक्रधर सम्मान समारोह मे तरुणा साहु का बड़े स्तर पर सम्मान किया गया इस कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा कार्यक्रम मैं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे सभी ने पंडवानी शैली गायन की सराहना की।




