परमिट लेकर ग्रिड पर काम करने चढ़े कर्मचारी की करंट लगने से मौत

ग्रिड पर सुधार कार्य करते समय करंट की चपेट में आया 32 वर्षीय धर्मेंद्र; परमिट प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सोनकच्छ। सोनकच्छ थाना क्षेत्र के ग्राम चौबारा जागीर में बुधवार को विद्युत ग्रिड पर सुधार कार्य के दौरान करंट की चपेट में आने से 32 वर्षीय धर्मेंद्र पिता भीम सिंह सेंधव की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने विद्युत कार्य के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था और परमिट प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, विद्युत आपूर्ति किस परिस्थिति में शुरू हुई और घटना में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच का विषय है।
जानकारी के अनुसार गांव में विद्युत लाइन में तकनीकी खराबी आने के बाद धर्मेंद्र ग्रिड पर सुधार कार्य के लिए चढ़े थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने करीब 10 मिनट का परमिट लिया था। इसी दौरान विद्युत प्रवाह शुरू होने से धर्मेंद्र करंट की चपेट में आ गए और नीचे गिर पड़े। परिजन एवं ग्रामीण उन्हें तत्काल सोनकच्छ सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
परमिट की अवधि में बिजली कैसे हुई बहाल?
हादसे के बाद ग्रामीणों ने सबसे बड़ा सवाल परमिट प्रक्रिया को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि यदि धर्मेंद्र को विद्युत कार्य के लिए परमिट जारी किया गया था, तो उसकी अवधि के दौरान बिजली आपूर्ति किस प्रक्रिया के तहत बहाल हुई? ग्रामीणों ने पूरे मामले की विभागीय जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि परमिट जारी करने से लेकर विद्युत आपूर्ति बहाल होने तक निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं और बिजली चालू करने से पहले ग्रिड पर कार्य कर रहे व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी या नहीं।
धर्मेंद्र कर्मचारी थे या किस हैसियत से कर रहे थे काम?
घटना के बाद धर्मेंद्र के विद्युत विभाग से जुड़े होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी है। जनपद पंचायत अध्यक्ष सूरज सिंह ठाकुर ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से फोन पर चर्चा की। ग्रामीणों के अनुसार बातचीत में अधिकारियों ने धर्मेंद्र के विभागीय कर्मचारी होने से इनकार किया।
ऐसे में सवाल यह भी है कि धर्मेंद्र किस हैसियत से विद्युत ग्रिड पर कार्य कर रहे थे, उनके पास कोई नियुक्ति, कार्यादेश अथवा अधिकृत अनुमति थी या नहीं तथा कार्य के दौरान उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। इन बिंदुओं का खुलासा विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगा।
पूर्व मंत्री वर्मा ने कलेक्टर से की चर्चा
घटना की जानकारी मिलने के बाद जनपद पंचायत अध्यक्ष सूरज सिंह ठाकुर ने पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को मामले से अवगत कराया। इसके बाद वर्मा ने देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह से फोन पर चर्चा कर घटना की जानकारी दी। कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार नेहा शाह सोनकच्छ सिविल अस्पताल पहुंचीं।
सहायक प्रशिक्षण डीएसपी जतिन लाहोरिया एवं सोनकच्छ थाना प्रभारी विक्रांत झंझोट भी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। मामले की जांच जारी है।
दो छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
धर्मेंद्र की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। मृतक के दो छोटे बच्चे हैं। परिजनों एवं ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उचित सहायता नहीं मिलने पर चक्काजाम जैसे कदम पर विचार किया जा सकता है।
ग्रामीणों की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि परमिट के बावजूद विद्युत आपूर्ति कैसे शुरू हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई थी या नहीं। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल परमिट की वास्तविक स्थिति, विद्युत आपूर्ति शुरू होने की प्रक्रिया और धर्मेंद्र के अधिकृत रूप से कार्य करने की स्थिति जांच के प्रमुख बिंदु हैं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।




