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शाजापुर में भू-माफिया बेलगाम : प्रशासन की चुप्पी या खुला संरक्षण? शासकीय तालाब, कब्रिस्तान के बाद अब रेलवे क्षेत्र से लगी भूमि पर अवैध कॉलोनी — नोटिस जारी, कार्रवाई शून्य “सब कुछ रिकॉर्ड में, फिर भी सन्नाटा—एक और अवैध कॉलोनी को कानून का मज़ाक बनते देखिए”

सब कुछ रिकॉर्ड में, फिर भी सन्नाटा—एक और अवैध कॉलोनी को कानून का मज़ाक बनते देखिए”

शाजापुर में भू-माफिया बेलगाम : प्रशासन की चुप्पी या खुला संरक्षण?

शासकीय तालाब, कब्रिस्तान के बाद अब रेलवे क्षेत्र से लगी भूमि पर अवैध कॉलोनी — नोटिस जारी, कार्रवाई शून्य

सब कुछ रिकॉर्ड में, फिर भी सन्नाटा—एक और अवैध कॉलोनी को कानून का मज़ाक बनते देखिए”

 

शाजापुर। मनीष कुमार, ब्यूरो प्रमुख। शाजापुर में भू-माफिया अब कानून और प्रशासन दोनों को खुली चुनौती दे रहा है। तालाब, कब्रिस्तान जैसी संवेदनशील शासकीय जमीनों को निगलने के बाद अब रेलवे स्टेशन के पीछे, ग्राम कांजा रोड और खेड़ा पहाड़ रोड के मध्य शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। हैरानी यह कि बार-बार संज्ञान, खबरें प्रकाशित होने और नोटिस जारी होने के बावजूद एक इंच जमीन भी मुक्त नहीं कराई गई।

सरकारी जमीन, खुली प्लॉटिंग, खुलेआम बिक्री

स्थल निरीक्षण व दस्तावेज बताते हैं कि सर्वे नंबर 539 (महूपुरा शहरी क्षेत्र) पूर्णतः शासकीय भूमि है। बावजूद इसके यहां सुनियोजित प्लॉटिंग, सड़क निर्माण और ले-आउट बनाकर खुलेआम प्लॉट बेचे जा रहे हैं। न कोई सीलिंग, न रोक, न ध्वस्तीकरण- कानून जैसे मौके से गायब है।

पहले भी निगली गई सरकारी जमीन

यह कोई पहला मामला नहीं।

सर्वे 242 (राजनगर)

सर्वे 41 व 8-9 (काशीनगर)

इन स्थानों पर शासकीय तालाब और कब्रिस्तान पर कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। आज तक न सड़क टूटी, न जमीन वापस आई। नतीजा- माफिया मालामाल, शासन खाली हाथ।

नोटिस का खेल, माफिया का कब्जा स्थायी

सूत्रों के अनुसार प्रशासन का फार्मूला तय है-

पहला नोटिस → दूसरा नोटिस → फाइलें → अधिकारियों का तबादला → कॉलोनी स्थायी।

प्लॉट बिकते रहते हैं, कार्रवाई फाइलों में दफन।

बयान बनाम हकीकत

एसडीएम शाजापुर का कहना— “नोटिस जारी हो चुके हैं, जल्द कार्रवाई होगी।”

पटवारी— “पंचनामा बनाया गया है।”

हकीकत: मौके पर बिक्री जारी। डर शून्य। नोटिस माफिया के लिए कागज़ का टुकड़ा।

जब सब कुछ रिकॉर्ड में है, तो बुलडोज़र क्यों नहीं?

जमीन शासकीय है

रिकॉर्ड मौजूद है

पंचनामा हो चुका

नोटिस जारी

फिर भी-

तत्काल ध्वस्तीकरण क्यों नहीं?

प्लॉटिंग पर रोक क्यों नहीं?

एफआईआर क्यों नहीं?

प्रश्न सीधे-सीधे हैं-

क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है?

क्या राजनीतिक संरक्षण है?

या फिर भू-माफिया तंत्र इतना मजबूत हो चुका है कि कानून बौना पड़ गया?

कानून क्या कहता है- और प्रशासन क्या कर रहा है?

विधि विशेषज्ञों के अनुसार शासकीय भूमि पर कब्जा, अवैध प्लॉटिंग, बिना अनुमति ले-आउट और जनता से धोखाधड़ी संज्ञेय अपराध हैं।

म.प्र. नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम और भू-राजस्व संहिता में तत्काल एफआईआर, गिरफ्तारी और ध्वस्तीकरण का प्रावधान है।

पर शाजापुर में कानून किताबों तक सीमित क्यों?

जिला अधिकारी की चुप्पी क्या संकेत देती है?

बार-बार खबरें, लगातार संज्ञान- फिर भी कार्रवाई नहीं।

क्या प्रशासन मूकदर्शक है या पार्टनर?

जनता का शक गहराता जा रहा है कि भू-माफिया को अंदरूनी संरक्षण मिल रहा है।

जनता का सीधा सवाल-

आखिर कब?

क्या प्रशासन सिर्फ नोटिस निकालता रहेगा?

या पहली बार माफिया की कॉलोनी नहीं, माफिया का हौसला तोड़ा जाएगा?

अब फैसला शाजापुर प्रशासन के हाथ में है—

या तो इतिहास रचिए, या फिर एक और अवैध कॉलोनी को कानून का मज़ाक बनते देखिए।

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