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देवास में सिस्टम वेंटिलेटर पर, विधायक और महापौर साधे मौन, जनता परेशान

वार्ड क्रमांक 21 का प्रशासनिक अंगभंग | बार-बार शिकायत के बाद भी कुंभकर्णी नींद में निगम प्रशासन | 24 घंटे में सफाई-पानी-लाइट न सुधरे तो निगम घेराव और सीएम हेल्पलाइन का अल्टीमेटम

देवास। विकास के लुभावने दावों और होर्डिंग्स के पीछे देवास नगर निगम के वार्ड क्रमांक 21 (बजरंग नगर) से एक बेहद शर्मनाक और डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। जहाँ एक तरफ पूरा शहर और प्रदेश आस्था के महापर्व ‘गणेश उत्सव’ के उल्लास में डूबा है, वहीं बजरंग नगर के नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। क्षेत्र में व्यवस्थाएं इस कदर ध्वस्त हो चुकी हैं कि ऐसा लग रहा है जैसे पूरा प्रशासनिक सिस्टम लकवाग्रस्त हो चुका है।

विधायक और महापौर पर सीधे सवाल, जवाबदेही से कब तक भागेंगे जिम्मेदार?
इस पूरे मानवीय संकट में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल क्षेत्रीय विधायक गायत्री राजे पंवार और शहर की प्रथम नागरिक महापौर गीता अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। चुनाव के समय घर-घर जाकर वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि आज जनता की इस चीख-पुकार पर मौन क्यों साधे हुए हैं?
• क्या विधायक पंवार की नज़र सिर्फ बड़ी घोषणाओं पर है, वार्डों की जमीनी हकीकत पर नहीं?
• नगर निगम बोर्ड और बजट पर सीधा प्रभाव रखने के बावजूद विधायक ने लापरवाह अधिकारियों की क्लास क्यों नहीं ली?
• महापौर की नाक के नीचे मातहत कर्मचारी और अधिकारी पूरी तरह निरंकुश और बेलगाम हो चुके हैं, फिर भी महापौर अग्रवाल का कोई सख्त एक्शन सामने क्यों नहीं आया?
जब जनता द्वारा चुने गए स्थानीय पार्षद खुद यह कहकर अपनी लाचारी जाहिर कर रहे हैं कि ‘मैंने निगम में बोल दिया है, लेकिन अधिकारी नहीं सुन रहे’, तो यह स्पष्ट है कि सत्ता और प्रशासन की कमान किसके हाथ में है।
पढ़े-लिखे आयुक्त दलीप कुमार भी बेअसर, दांव पर लगी साफ-सुथरी छवि!
प्रशासनिक संकट की गहराई इस बात से आंकी जा सकती है कि देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करके आए नगर निगम आयुक्त की प्रशासनिक पकड़ पूरी तरह ढीली साबित हो रही है। शुरुआत में वर्तमान आयुक्त की छवि एक बेहद ईमानदार और कड़क अधिकारी के रूप में पेश की गई थी। लेकिन शहर के बदतर हालात और अधिकारियों की बेलगामी ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इतना भ्रष्ट हो चुका यह सिस्टम अब आयुक्त दलीप कुमार से भी नहीं संभल रहा है? एक पढ़े-लिखे शीर्ष अधिकारी की नाक के नीचे जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है और मातहत कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं।

24 घंटे का अल्टीमेटम: आर-पार के मूड में बजरंग नगर की जनता
समय पर टैक्स भरने के बदले ज़हरीला पानी, बदबूदार सीवरेज, अंधेरी सड़कें और अधिकारियों की बेरुखी पा रही जनता का सब्र अब टूट चुका है। बजरंग नगर निवासियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 24 घंटे में स्वच्छ पानी सप्लाई नहीं हुआ, सीवरेज साफ नहीं किया गया और लाइटें नहीं सुधारी गईं, तो वे नगर निगम का घेराव करेंगे तथा सीधी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) व उच्च स्तर पर दर्ज कराई जाएगी।




