आदिवासी समुदाय का पारंपरिक जवारीया महोत्सव कथा के साथ संपन्न
जल जंगल और पर्यावरण बचाने का आह्वान

नयापुरा घाटी में 7 दिवसीय कलश जवारिया महोत्सव का समापन, सुमरनी हवन-पूजन के साथ पूर्णाहुति*
नयापुरा घाटी (सतवास) देवास |* ग्राम नयापुरा घाटी में चल रहा सात दिवसीय प्रकृति शक्ति पंच तत्व जवारे कलश बड़ा बूढ़ा देव महोत्सव आज *21 सितम्बर 2026 को पूर्णाहुति* के साथ संपन्न हुआ।
पिछले 7 दिनों से चल रहे इस आदिवासी महोत्सव में जल, जमीन, हवा, आकाश, अग्नि इन पंच तत्वों की विशेष पूजा की गई। 15 सितम्बर को कन्याओं द्वारा जंगल से खाना गार माटी लाकर जवारे बोया गये थे।
*समापन अवसर पर हुए कार्यक्रम*
सोमवार सुबह से सुमरनी हवन पूजा चली , जिसमें पति-पत्नी के जोड़ों ने अपने आदिवासी परम्परागत रीति-रिवाज से भाग लिया। धर्मगुरु भूमका तिरु. दिलीप जी मरपाची नेवासची के सानिध्य में हवन-पूजन कर प्रकृति को बचाने का संकल्प लिया गया।
आयोजक समिति के अध्यक्ष तेजराम जी उइके ने बताया कि प्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम का संपन्न हुआ । इस दौरान क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहें।
गौरतलब है कि 18 सितम्बर को शंकर शाह रघुनाथ शाह बलिदान दिवस भी इसी मंच से मनाया गया और 20 सितम्बर को क्षेत्र की भजन मंडलियों द्वारा रात्रि जागरण किया गया ।
समिति ने बताया कि यह कार्यक्रम तीसरे वर्ष भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें हमारे पुरखों ने प्रकृति को बचाने के लिए जो बलिदान दिया, उन्हे याद भी किया गया
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