मेरी लड़कियां किसी लड़के से कम नहीं यह कहती रही मम्मी -आस्था जोशी
जमाना बदल रहा है समाज की पुरानी परंपरा समय के साथ-साथ परिवर्तित हो रही है

जोशी परिवार में लड़कियों ने निभाया लड़कों का फर्ज मां की अंतिम यात्रा में शामिल होकर दिया कंधा
सुनिल योगी (संवाददाता) बागली। बागली नगर के सामाजिक ब्राह्मण परिवार दिवंगत रामचंद्र जोशी की पुत्रवधू एवं स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी अनिल जोशी की धर्म पत्नी अधिवक्ता दीपक जोशी की कई सेवानिवृत्ति रमेश चंद्र जोशी की बहू सुरक्षा जोशी का बुधवार रात्रि में हार्ट अटैक के चलते 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया दिवंगत सुरक्षा जोशी आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता के रूप में दगड़ी में पदस्थ रही उनके साथी कार्यकर्ताओं ने बताया कि आखिरी समय तक वह विभाग का कार्य ईमानदारी से करती रही बुधवार सुबह उन्होंने अपने मोबाइल से विभाग का पूरा डाटा अधीनस्थ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी जामले को ट्रांसफर कर दिया गौर तलब है कि दिवंगत सुरक्षा जोशी के कोई पुत्र नहीं है उनकी तीन लड़कियां आस्था जोशी इशीका जोशी अंतिमा जोशी द्वारा मां की अंतिम यात्रा एवं अंतिम समय में पुत्र जैसा फर्ज निभाते हुए अर्थी को कंधा देते हुए मुक्तिधाम स्थल पहुंची यह दृश्य देखकर पूरा समाज और साथ चल रहे सभी लोग भाव विभोर हो गए हाल ही में हाट पिपलिया में भी जोशी परिवार में ही योगेश जोशी के निधन पर उनकी लड़कियों ने रस्म निभाई । परिवार से जुड़े वरिष्ठ शिक्षक एवं विद्वान पंडित वासुदेव जोशी ने बताया कि जिन परिवारों में लड़का नहीं रहता और सिर्फ लड़कियां रहती है तो यह सब कर्मकांड लड़कियों को ही करना न्याय संगत शास्त्र संगत माना गया है। सुरक्षा जोशी की लड़की आस्था जोशी(मुन मुन)इतिशा जोशी अंतिमा जोशी (अधिवक्ता)ने दुखी मन से हमारे संवाददाता सुनील योगी को बताया कि उनकी मां सुरक्षा जोशी हमेशा लड़कियों में कोई फर्क नहीं करती और मित्र जैसा ही व्यवहार करते हुए गर्व से समाज के सामने कहती रही मेरी लड़कियां लड़कों से कम नहीं है। उनकी कहीं बातें आज भी कानों में गूंजती है। उनके जैसी मां सभी बच्चों को मिले विशेष कर लड़कियों को जिसने यह सीख दी के लड़के और लड़कियों में कोई अंतर नहीं रहता कुशल ग्रहणी होने के साथ-साथ वह कुशल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी रही छोटे से गांव दगड़ी में आंगनबाड़ी के सुपुर्द आये सभी कार्य बखूबी करती रही और घर परिवार का भी ध्यान रखते रही दिवंगत सुरक्षा जोशी की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समाज और नगर के लोग शामिल हुए।




