सिलाई मशीन से बदली जिंदगी, अब ₹2.40 लाख सालाना कमाती हैं सविता मेहरा

“एक छोटी शुरुआत… और आत्मनिर्भरता की बड़ी उड़ान।”
खातेगांव, हरणगांव। महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में हरणगांव की रहने वाली सविता मेहरा ने मेहनत, हौसले और अवसर का बेहतर उपयोग कर अपनी अलग पहचान बनाई है। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच जीवन गुजारने वाली सविता आज विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर सालाना करीब 2 लाख 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
सविता का आत्मनिर्भरता का सफर करीब 9 वर्ष पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ नेतृत्व और समूह संचालन का अनुभव मिला। आगे चलकर उन्होंने स्वयं भी एक महिला स्वयं सहायता समूह खड़ा किया और अन्य महिलाओं को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
₹20 हजार के ऋण से शुरू किया सिलाई का काम
सविता ने अपनी आजीविका शुरू करने के लिए समूह के माध्यम से 20 हजार रुपये का शुरुआती ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और कपड़े सिलने का काम शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह प्रयास धीरे-धीरे उनकी आय का मजबूत आधार बन गया।
रुकी पढ़ाई फिर शुरू की, 10वीं की परीक्षा पास की
आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ सविता ने शिक्षा को भी अपने जीवन में दोबारा स्थान दिया। उन्होंने अपनी रुकी हुई पढ़ाई फिर शुरू की और मेहनत के साथ 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनका मानना है कि महिला के आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
सिलाई से राशन दुकान और पंचायत के काम तक बढ़ा दायरा
सविता ने केवल सिलाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने गांव में सार्वजनिक राशन दुकान के संचालन की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके साथ ही उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें ग्राम पंचायत के राजस्व/कर वसूली से संबंधित कार्य भी सौंपा गया।
आज सिलाई, राशन दुकान संचालन और पंचायत से जुड़े कार्यों सहित विभिन्न गतिविधियों से होने वाली आय ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। सविता बताती हैं कि लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर वे अब सालाना लगभग 2 लाख 40 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
सविता मेहरा की कहानी यह बताती है कि छोटे प्रयास और सीमित पूंजी से शुरू किया गया काम भी मेहनत, प्रशिक्षण और सही अवसर मिलने पर आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। आज वे न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी हुई हैं।




