सोमवार को हुई अमृत वर्षा से किसानों के चेहरे खिल गए
अगस्त माह सूखा सूखा बीत जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई

बागली। लंबे इंतजार के बाद सोमवार को बागली क्षेत्र में हुई तेज बारिश ने किसानों की चिंता थोड़ी कम कर दी
खासकर ढालान क्षेत्र के गुवाड़ी, रामपुरा और मालीपुरा में दोपहर तक हुई झमाझम बारिश से खेतों में खड़ी सोयाबीन और मक्का फसलों को जीवन मिल गया। सोमवार को हुई बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे,
अगस्त माह में अपेक्षित बारिश नहीं होने और सितंबर के शुरुआती दिन लग भग सूखे निकल जाने से किसानो को खेतों में खड़ी सोयाबीन और मक्का की फसल की चिंता होने लगी और इस समय फसल को पानी की विशेष आवश्यकता भी रहती है। दोनों ही फसल में फल बैठ रहा है । सोमवार को हुई बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई। वरिष्ठ किसानों का कहना है कि इस बारिश से फिलहाल फसलों को काफी फायदा होगा, लेकिन मौसम का साथ अभी कुछ दिनों तक और मिलना जरूरी है।
तीन घंटे तक उफान पर रही नदी, रास्ता बंद-
सोमवार सुबह करीब 10 बजे हल्की बूंदाबांदी के साथ बारिश की शुरुआत हुई। इसके बाद करीब 11 बजे बारिश ने तेज रूप ले लिया और लगातार दोपहर करीब 3 बजे तक बारिश होती रही। लगातार तेज बारिश के कारण बेहरी की नदी में अचानक पानी बढ़ गया और नदी उफान पर आ गई। इसके चलते करीब तीन घंटे तक मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। रास्ता बंद होने से स्कूली बच्चों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पानी कम होने के बाद ही आवागमन सामान्य हो सका।
कुएं-तालाब अब भी पूरी तरह नहीं भरे-
क्षेत्र में बारिश की स्थिति को लेकर किसानों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। क्षेत्र के कई कुएं, बलराम तालाब सहित छोटे-बड़े तालाब अभी आधे-अधूरे ही भरे हैं। नदी में भी बारिश के दौरान ही पानी का बहाव दिखाई देता है। अगस्त माह में नदी के सूखे नजर आने से क्षेत्र में जल संकट की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता था।
ऐसे में सोमवार की तेज बारिश ने न केवल खेतों को पानी दिया, बल्कि जलस्रोतों में भी कुछ पानी पहुंचाया है। किसानों को उम्मीद है कि आगामी दिनों में भी अच्छी बारिश होती है तो कुएं-तालाबों का जलस्तर बढ़ेगा और खरीफ फसलों को भी पर्याप्त नमी मिल सकेगी।
मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों में तेज बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश होती है तो किसानों को और राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सोमवार की बारिश ने सूखे के बीच किसानों को राहत जरूर दी है, लेकिन अच्छी फसल के लिए उनकी नजरें अब आसमान पर टिकी हैं।





