बागली नगर की पहली ग्रेजुएट बेटी ने शिक्षा का ऐसा अलख जगाया आज उनके द्वारा शिक्षित की गई 50 से अधिक महिलाएं शैक्षणिक सेवाएं दे रही है।
वट वृक्ष के रूप में शिक्षिका द्वारा पहली पीढ़ी में 40 दूसरी पीढ़ी में 20 शिक्षिकाओं का निर्माण किया


बागली। पिछले दिनों शिक्षक दिवस के अवसर पर ग्राम से लेकर शहरों और कस्बों से शिक्षकों के सम्मान कार्यक्रम हुए। बागली में दो सेवानिवृत शिक्षिकाओं ने एक अलहदी पहल की, जिसमें उन्होंने अपने मिडिल स्कूल की सेवानिवृत वरिष्ठ शिक्षिका का सम्मान किया। इस कार्यक्रम की एक मजेदार बात यह रही कि वरिष्ठ शिक्षिका ने इन दोनों में से एक शिक्षिका की पुत्री को भी पढ़ाया है और वो भी वर्तमान में शिक्षिका के पद पर ग्राम पुंजापुरा में पदस्थ है। जानकारी के अनुसार बागली के बालक मिडिल स्कूल और आरिया के प्राथमिक स्कूल से रिटायर शिक्षिकाओं क्रमशः लेखराज शिवहरे और दाखा कारपेंटर ने बागली के गढ़ी चौक निवासी वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षिका मदनकुंवर सेंगर(चौहान) का शाल – श्रीफल भेंटकर व उत्तरीय एवं मोती की माला पहनाकर सम्मान किया। दोनों शिक्षिकाओं ने बताया कि श्रीमती सेंगर बागली में जन्मी सबसे पहली स्नातक थीं और शिक्षिका बनी। फिर उन्होंने सेवानिवृत्ति तक नगर के विभिन्न स्कूलों में अध्यापन किया। उनसे हमें पढ़ने और आगे बढ़कर अपने पैरों पर खड़ा होने की प्रेरणा मिली।उन्होंने हमें पढ़ाया भी। कालान्तर में हमें यह सौभाग्य भी मिला कि हमने उनके साथ अध्यापन भी किया। इस क्रम में एक अन्य सेवानिवृत्त शिक्षिका सरोज जौहरी और हाई स्कूल शिक्षिका निशा योगी ने बताया कि श्रीमती सेंगर बहनजी ने नाम से प्रसिद्ध थीं और उन्होंने हमें भी पढ़ाया और हमने उनके साथ पदस्थ रहकर शिक्षण करने का गौरव भी प्राप्त किया। उनसे पढ़ते हुए और बाद में उनके साथ अध्यापन करने के दौरान उनका हमारे प्रति नजरिया, व्यवहार और सहयोगात्मक रवैया कार्य के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
40 वर्ष तक शिक्षण किया
बागली में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए स्वाधीनता से 27 वर्ष पहले ब्रिटिश इंडिया में वर्ष 1920 में बागली के तत्कालीन महाराज ने बालिका स्कूल की स्थापना की थी। जिसमें सभी वर्ग की छात्राओं को प्रवेश दिया जाता था। जानकारी के अनुसार वर्ष 1920 में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए बागली रियासत के तत्कालीन महाराज रणजीतसिंह ने अपनी पुत्री की स्मृति में कंचन कुंवर गर्ल्स स्कूल की शुरुआत की थी। जिसकी आधारशिला बिर्टिश मालवा प्रांत के राजनैतिक प्रतिनिधि कर्नल ह्युज अगस्तस गूच ने रखी थी। रियासत के खर्च पर स्कूल शुरू हुआ और संचालित भी हुआ। 34वें क्रम पर थीं बालिका स्कूल में दर्ज
नगर की शिक्षाविद मदनकुंवर सेंगर वर्ष 1954 -1955 के दौरान कंचन कुंवर गर्ल्स स्कूल में 34वे नंबर इनरोल थीं। सम्भवतः वे नगर में की पहली ग्रेजुएट लड़की थीं। शिक्षा के दौरान ही उन्होंने शिक्षकीय पेशा चुना और कई वर्ष तक कंचन कुंवर गर्ल्स स्कूल जोकि अब कन्या माध्यमिक स्कूल में तब्दील हो चूका था में शिक्षण किया। बाद में इसी परिसर में संचालित कन्या हाई स्कूल में शिक्षण करते हुए वे रिटायर हुईं। उनकी पढ़ाई हुई 50 से अधिक छात्राओं ने शासकीय या निजी शिक्षक का पेशा चुना। वर्ष 2007 में वे रिटायर हुई और लगभग 40 वर्ष से अधिक उन्होंने शिक्षण किया। चर्चा में उन्होंने कहा कि यदि आपके पढ़ाई हुए विद्यार्थी की बेटी या बेटा शिक्षक का पेशा चुनता है तो यह कर्तव्य की नैतिक सफलता है। आजकल शिक्षण पहले की तुलना में अधिक सरल और सहज है। लेकिन शासन को चाहिए कि वो शिक्षक को काम की मशीन बनाकर गैर शिक्षकीय कार्य ना करवाए।





