प्रकृति की गोद में क्षेत्र का अभ्यारण आपको बुला रहा है
वर्तमान में यहां प्रवेश बंद है लेकिन जैसे ही खुलता है आप पहुंचे

सुनील योगी देवास जिले के कन्नौद विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित खीवनी अभ्यारण यदि आपने नहीं देखा तो 15 जुलाई के पहले यहां पर परिवार सहित अवश्य पहुंचे आगामी 15 जुलाई तक यह आम लोगों के लिए चालू रहेगा बारिश के चार महीने बाद फिर से यहां का आनंद उठाया जा सकता है। देवास जिला मुख्यालय एवं इंदौर मुख्यालय से समान दूरी पर स्थित लगभग 130 किलोमीटर यह स्थान वन्य जीवो के लिए संरक्षित है। मेरी यात्रा आरंभ होती है। बागली मुख्यालय से यहां से चापडा होते हुए बिजवाड़ पानी गांव कुस्मानिया कोलारी होते हुए ओकांरा गांव से यहां पर पहुंच सकते हैं । बागली से अभ्यारण स्थल पर पहुंचने के लिए आपको
75 किलोमीटर दूरी तय करना होगी और यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। हैं। रविवार के दिन हमने भी परीवार सहित यहां घुमने की योजना बनाई अल्टो कार एवं वेगन आर कार लेकर सुबह जल्दी 6 बजे उठकर तैयार होकर घर से(बागली) निकले और यह दूरी तय करते हुए खीवनी अभ्यारण के प्रमुख द्वार पर पहुंचे यहां पर प्रति निजी वाहन को
स्वयं घुमने के लिए उपयोग किया जिसका 750 रुपए का शुल्क लिया गया यदि पर्यटक यहीं से जिप्सी किराए पर लेते हैं। तो उसका शुल्क 3500 रुपए निश्चित है।हालांकि हम अपने निजी वाहन से थे। तो यह शुल्क हमें 750 रु प्रति वाहन के हिसाब से1500 में घूमना तय हो गया एक बात और प्रत्येक वाहन के मार्गदर्शन के लिए एक गाइड रखना आवश्यक है। यह गाइड यहां की समाजसेवी संस्था 500 में उपलब्ध करवाती है। जो पूरे समय साथ में जंगल में टेढ़े-मेढ़े रास्ते से होते हुए टाइगर लेपर्ड एवं अन्य पशु पक्षी सरीसृप
निल गाय और प्रवासी पक्षियों की मूवमेंट क्षेत्र में घूमाते हैं। हालाकि हमें टाइगर नहीं दिखा किंतु मृग हिरण बारहसिंगां काला हिरण नील गाय और 10 से अधिक प्रकार के प्रवासी पक्षी कछुए गिद्ध बड़ी साइज की गिलहरी लंगूर तथा बड़ी प्रजाति के सांप दिखाई दिए। यहीं पर 11वीं शताब्दी का बना प्राचीन मंदिर है। जहां पर जल धारा निकलती है जिसे स्थानीय लोग बाण गगां बताते हैं। जहा से 12 महीने निरंतर निर्मल जल बहता रहता हे जिससे यहां पर रुके हुए पानी का कुंड बना हुआ है। साथ ही में खुदाई के दौरान मिली प्राचीन प्रतिमाएं भी सहा पर स्थित है। यहां पर नाइट सफारी ओर रुकने के लिए अलग-अलग कंटेज बने हुए हैं। भोजन की भी यही कैंपस में है लेकिन यह
व्यवस्था थोड़ी महंगी जरूर है। लेकिन बेहतर भोजन यहां पर मिलता है। गाइड द्वारा हमें बताया गया कि इस पूरे क्षेत्र में हिंसक जानवरों की मूवमेंट बनी रहती है। इसलिए सुरक्षा की हष्टि से अकेले जंगल में किसी को घूमने नहीं जाने दिया जाता है। यहीं पर बड़ा कैंपस बना हुआ है ।जहां अच्छे हरियाली वाली जगह पर कुछ देर विक्षाम करने के लिए बेहतर स्थान बना हुआ है। हर आने जाने वाले की पर्यटक की इंट्री यहां पर रजिस्टर्ड होती है। एन जी ओ संस्था द्वारा यहां पर भोजन शाला और अन्य व्यवस्था का सँचालन शासन की मदद से किया जाता है। यदि आप पूरे जंगल स्थान की विकसित करना चाहते हैं तो यहां पर उपलब्ध जिप्सी का किराया 3500 रु तय है। और अतिरिक्त 500 गाइड का किराया रहता है। यहां चलने वाली जिप्सी में छोटे-बड़े 9 लोग बेठ सकते हैं। यह वास्तव में प्राकृतिक आवास वाला क्षेत्र है। दूर-दूर तक हरियाली और जामनेर नदी का टेदा-मेढ़ा बहाव ओर पूरे क्षेत्र में नदी किनारे 200 से 300 वर्ष पुराने अर्जुन के वृक्ष लगे हुए हैं । जिससे यह पूरा क्षेत्र हरियाली से युक्त रहता है। शहद छत्ते भी बहुत मात्रा में पेड़ों पर लगे दिखाई देते है। पैदल नीचे घूमते समय जहरीले जानवर जैसे सांप बिच्छू गोयरे का ध्यान रखना पड़ता है। हम एक स्थान पर फोटो शूट करने के लिए उतरे ही थे कि सामने 8 से 9 फीट लंबे दो बड़े सांपं विचरण करते दिखाई दिए हालांकि उनसे हमारी थोड़ी दूरी थी। एक अन्य स्थान पर कछुआ और गिद्ध जलाशय के पास दिखाई दिए मृग हिरण बारह सिंगा चितल हिरण और नीलगाय भी विचरण करते दिखाई दीये विश्राम स्थल पर महज दो माह का मृग शावक भी दिखाई दिया जो आम व्यक्तियों में घुल मिल गया है। वहां का स्टाफ बताता है कि इसकी मां आती है। और दूध पिलाकर चली जाती है। तो देर किस बात की आप भी थोड़ा खर्च करके देवास जिले की इस प्रकृति सुंदरता को देखने अवश्य पहुंचें आप साथ में खाने-पीने का सामान जरूर ले लेकिन खरीदे भी ताकि स्वयं सेवी संस्था द्वारा संचालित रेस्टोरेंट को भी थोड़ा लाभ मिल सके। और अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर इस अभ्यारण का नाम डालने से पूरी जानकारी सामने आ जाती है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार है।)




