तारीख पर तारीख: गेहूं खरीदी में देरी से किसान परेशान।
अब 10 व 15 अप्रैल से शुरू होगी गेहूं खरीदी, पहले कई बार बदली जा चुकी है तारीख

सोनकच्छ। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को लेकर सरकार की तैयारियों की पोल खुलती नजर आ रही है। बार-बार बदलती तारीखों ने किसानों को असमंजस, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में डाल दिया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, भोपाल द्वारा 30 मार्च 2026 को जारी आदेश में एक बार फिर खरीदी की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। अब इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में खरीदी 10 अप्रैल से, जबकि शेष संभागों में 15 अप्रैल से शुरू की जाएगी।
पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल… अब फिर बढ़ी तारीख
सरकार की कार्यशैली पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पहले खरीदी की तारीख 16 मार्च तय की गई थी, फिर 1 अप्रैल और अब दोबारा आगे बढ़ा दी गई।
किसानों का कहना है कि यह “तारीख पर तारीख” की नीति उनकी कमर तोड़ रही है।
फसल तैयार, खरीदी व्यवस्था गायब
क्षेत्र में रबी फसल की कटाई पूरी हो चुकी है और किसान उपज बेचने के लिए तैयार हैं, लेकिन खरीदी शुरू नहीं होने से वे इंतजार करने को मजबूर हैं।
किसानों का आरोप है कि सरकार की अधूरी तैयारियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
खुले में पड़ी उपज, बढ़ रहा नुकसान
खरीदी में देरी के चलते किसानों की उपज खुले में पड़ी है, जिससे बारिश, नमी और कीटों से नुकसान का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे हालात में किसानों को मजबूरी में समर्थन मूल्य से कम दर पर फसल बेचना पड़ रहा है।
75% फसल सस्ते में बेचने की नौबत
किसानों का कहना है कि यदि जल्द खरीदी शुरू नहीं हुई, तो वे अपनी 70-75% फसल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हो जाएंगे।
नकदी की कमी और उपज खराब होने के डर से किसान व्यापारियों के सामने झुकने को विवश हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश
खरीदी में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा अब सोशल मीडिया पर भी खुलकर सामने आ रहा है।
कई किसान फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट डालकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं।
कुछ किसान इसे “प्रबंधन की नाकामी” बताते हुए सवाल उठा रहे हैं कि जब फसल तैयार थी, तो खरीदी की तैयारी समय पर क्यों नहीं की गई।
शादी-ब्याह के सीजन में बढ़ी चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है। कई किसानों के घर कार्यक्रम तय हैं, लेकिन खरीदी में देरी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
किसानों का कहना है कि जब उपज का पैसा ही नहीं मिलेगा, तो वे सामाजिक जिम्मेदारियां कैसे निभाएंगे। मजबूरी में उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है।
कर्ज और भुगतान का दबाव
बैंक कर्ज, बिजली बिल और अन्य देनदारियों का दबाव किसानों पर लगातार बढ़ रहा है।
समय पर भुगतान नहीं मिलने से नकदी संकट गहराता जा रहा है और आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।
किसानों में आक्रोश, सरकार से जवाब मांगा
बार-बार तारीख बदलने से किसानों में भारी नाराजगी है। उनका सवाल है—
“जब फसल तैयार थी, तो खरीदी व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई?”
मांग: तुरंत शुरू हो खरीदी, मिले राहत
किसानों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि खरीदी प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए और व्यवस्था पारदर्शी व सुचारु बनाई जाए, ताकि उन्हें समर्थन मूल्य मिल सके और आर्थिक राहत मिल सके।




