देवास जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर कलेक्टर सख्त। “निजी स्कूलों द्वारा एक ही दुकान से किताब-कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव नहीं चलेगा”

सोनकच्छ। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और किताब-कॉपियों के कारोबार में एकाधिकार पर लगाम लगाने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ऋतुराज सिंह ने सख्त आदेश जारी किए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (1)(2) के तहत जारी निर्देश पूरे देवास जिले में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी स्कूल विद्यार्थियों या अभिभावकों को किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री किसी एक विशेष दुकान, विक्रेता या संस्था से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। इसका उद्देश्य अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
दो से अधिक यूनिफॉर्म नहीं, तीन साल तक नहीं बदलेगी
कलेक्टर के निर्देश अनुसार कोई भी विद्यालय अधिकतम दो यूनिफॉर्म ही निर्धारित कर सकेगा। इसके अतिरिक्त ब्लेजर या स्वेटर अलग होंगे। साथ ही यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
रिजल्ट से पहले किताब खरीदने की बाध्यता खत्म
विद्यालय अब विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम से पहले किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। अभिभावक अपनी सुविधा और उपलब्धता के अनुसार 30 अप्रैल 2026 तक पुस्तकें खरीद सकेंगे। अप्रैल माह में स्कूलों को विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन और पुनरावृत्ति गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य
सीबीएसई से संबद्ध सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकें ही लागू होंगी। निजी प्रकाशकों की अनावश्यक पुस्तकों को अनिवार्य नहीं किया जा सकेगा, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
तय सीमा से ज्यादा नहीं होगा स्कूल बैग का वजन
स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार विद्यार्थियों के बस्ते का वजन निर्धारित सीमा में ही रहेगा—
कक्षा 1 से 2 : 1.5 किलोग्राम
कक्षा 3 से 5 : 2 से 3 किलोग्राम
कक्षा 6 से 7 : 4 किलोग्राम
कक्षा 8 से 9 : 4.5 किलोग्राम
कक्षा 10 : 5 किलोग्राम
वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर पहले जारी होगी पुस्तकों की सूची
प्रत्येक विद्यालय को सभी कक्षाओं की अनिवार्य पुस्तकों की सूची परीक्षा परिणाम से पहले अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने और नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रवेश के समय अभिभावकों को इसकी प्रति उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा।
उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले विद्यालय संचालक, प्राचार्य या प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिले के सभी विद्यालयों को यह आदेश अपने सूचना पटल पर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।




