फसल बीमा कंपनी की 72 घंटे की शर्त या किसानों के साथ मज़ाक?

सोनकच्छ। प्राकृतिक आपदा के बाद पहले ही फसल चौपट होने से परेशान किसान अब बीमा कंपनी की तकनीकी शर्तों में उलझकर और ज्यादा परेशान हो रहे हैं। नियम के अनुसार किसान को 72 घंटे के भीतर 14447 नंबर पर कॉल कर अपनी पॉलिसी और आधार नंबर से शिकायत दर्ज करानी होती है। इसके बाद कंपनी का प्रतिनिधि मौके पर जाकर फोटो और विवरण पोर्टल पर अपलोड करता है।
लेकिन असली समस्या यहीं से शुरू होती है।
किसानों का आरोप है कि 14447 पर घंटों कॉल करने के बावजूद संपर्क नहीं हो पाता। कई बार लगातार कोशिश के बाद भी लाइन नहीं लगती। नतीजा — 72 घंटे की समय सीमा पूरी होते ही दावा स्वतः खारिज मान लिया जाता है।
यानी किसान आपदा से भी लड़े और नेटवर्क से भी?
ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में 72 घंटे की सख्त समय सीमा और एकमात्र कॉल विकल्प किसानों के साथ अन्याय जैसा प्रतीत होता है। सवाल यह उठता है कि जब कॉल ही नहीं लगे तो किसान अपनी शिकायत कैसे दर्ज कराए? क्या बीमा कंपनी इस तकनीकी खामी की जिम्मेदारी लेगी?
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि
72 घंटे की समय सीमा बढ़ाई जाए
कॉल सेंटर व्यवस्था दुरुस्त की जाए
ऑफलाइन या पंचायत स्तर पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी जाए
वरना यह योजना राहत कम और औपचारिकता ज्यादा बनकर रह जाएगी।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और बीमा कंपनी किसानों की इस पीड़ा पर ध्यान देती है या फिर 72 घंटे का नियम ही किसानों की उम्मीदों पर ताला लगाता रहेगा।




