बीएसएस फाइनेंस कर्मचारी ने लोन माफी का लालच देकर की धोखाधड़ी
ठगी के शिकार युवक ने थाने में दर्ज करवाई शिकायत

सोनकच्छ। भोलेभाले एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को लोन का झांसा देकर ठगी करने का मामला सामने आया है। एक निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी द्वारा लोन माफी एवं नया लोन स्वीकृत होने का लालच देकर युवक से हजारों रुपये जमा करवा लिए गए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित युवक ने संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध पुलिस थाने में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समीपस्थ ग्राम पीपल्या बक्सू निवासी अम्बाराम पोरवाल के साथ बी.एस.एस. सोनाटा माइक्रो क्रेडिट फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी द्वारा कथित रूप से धोखाधड़ी की गई। यह कंपनी ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में महिलाओं एवं जरूरतमंद लोगों को समूह लोन उपलब्ध कराने का कार्य करती है तथा इसका कार्यालय गोर्धनधाम कॉलोनी के सामने संचालित बताया जा रहा है।
आरोप है कि कंपनी में कार्यरत कर्मचारी विष्णु चावड़ा ने युवक को मोबाइल पर संपर्क कर 81 हजार रुपये का नया लोन स्वीकृत होने की बात कही। युवक ने पहले से एक लोन चलने की जानकारी दी, जिस पर कर्मचारी ने आश्वासन दिया कि पुराने लोन की राशि जमा कर शेष राशि नए लोन के रूप में दे दी जाएगी।
पीड़ित युवक कर्मचारी के झांसे में आ गया और अलग-अलग किश्तों में कुल 23 हजार 416 रुपये जमा करवा दिए।
इस प्रकार जमा करवाई गई राशि
11 फरवरी 2026 को ₹12,800 जमा
फाइल चार्ज के नाम पर ₹5,516
इसके बाद ₹5,100
17 फरवरी 2026 को पुनः ₹1,100 की मांग
इस प्रकार युवक से कुल ₹23,416 जमा करवाए गए।
बाद में जब युवक को संदेह हुआ तो उसने आगे राशि जमा करने से मना कर दिया और शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर) से जानकारी ली। वहां पता चला कि उक्त राशि पुराने लोन खाते में ही समायोजित की गई है तथा किसी भी प्रकार का नया लोन स्वीकृत नहीं हुआ है।
खुद को ठगा महसूस होने पर युवक ने पुलिस थाने में आवेदन प्रस्तुत कर कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर जांच प्रारंभ कर दी है।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला
मामले को लेकर जब कंपनी के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उन्होंने अपने-अपने कार्यक्षेत्र का हवाला देते हुए जिम्मेदारी से बचते नजर आए। एक अधिकारी ने इसे अपने विभाग का मामला नहीं बताते हुए अन्य अधिकारी से संपर्क करने को कहा।
कर्मचारी विष्णु चावड़ा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किन्तु उन्होंने मोबाइल उठाना उचित नहीं समझा। एरिया मैनेजर ने स्वयं के बाहर होने की बात कहते हुए ब्रांच मैनेजर से बात करने को कहा। वहीं ब्रांच मैनेजर का मोबाइल भी कई बार लगाने पर बंद मिला।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और पीड़ित पक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।




