शिक्षकों से नाराज़गी में नाबालिग ने रची अपहरण की झूठी कहानी
थाना प्रभारी अजय गुर्जर की सूझबूझ एवं तत्परता से हुआ त्वरित खुलासा, सीसीटीवी जांच में बेनकाब हुई साजिश

सोनकच्छ (देवास)। थाना सोनकच्छ क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग द्वारा सुनाई गई कथित अपहरण की कहानी से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हड़कंप मच गया। मामला प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत हुआ, जिसके चलते पुलिस प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। लेकिन थाना प्रभारी अजय गुर्जर की सतर्कता, सूझबूझ और तकनीकी जांच के चलते पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया। जांच में स्पष्ट हुआ कि अपहरण की कहानी पूरी तरह मनगढ़ंत थी।
स्कूल बस का इंतजार, अपहरण का दावा
जानकारी के अनुसार 14 वर्षीय राजा (परिवर्तित नाम) पिता – लक्ष्मी नारायण सुबह करीब 8:30 बजे स्कूल बस का इंतजार कर रहा था। बाद में वह परिजनों के साथ थाना पहुंचा और आरोप लगाया कि दो युवक पल्सर मोटरसाइकिल से आए और जबरन उसका अपहरण कर लिया।
नाबालिग ने दावा किया कि आरोपियों ने उसे नशीला पदार्थ सुंघाया, जिससे वह बेहोश हो गया। होश आने पर उसने चलती बाइक से कूदकर जान बचाने की बात कही। साथ ही बताया कि एक ट्रक चालक ने उसकी मदद की और डायल 112 पर कॉल कर उसे थाने पहुंचाया।
इस बयान से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
थाना प्रभारी अजय गुर्जर के निर्देश पर त्वरित जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी अजय गुर्जर ने तुरंत पुलिस टीम गठित कर जांच शुरू करवाई।
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घटनास्थल का निरीक्षण
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आसपास के मार्गों व टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच
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संभावित मार्गों की तकनीकी पड़ताल
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112 कॉल डिटेल्स का सत्यापन
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सीसीटीवी फुटेज में नाबालिग कहीं भी जबरन ले जाया जाता नहीं दिखा, बल्कि वह स्वेच्छा से आगे बढ़ता हुआ नजर आया। टोल नाकों की रिकॉर्डिंग में भी अपहरण जैसी कोई घटना सामने नहीं आई।
पूछताछ में टूटा नाबालिग, कबूली सच्चाई
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब दोबारा पूछताछ की गई तो नाबालिग टूट गया और उसने स्वीकार किया कि स्कूल में कुछ शिक्षकों के व्यवहार से नाराज़ होकर उसने स्कूल न जाने के उद्देश्य से झूठी अपहरण की कहानी गढ़ी थी।
समझाइश देकर परिजनों को सौंपा गया बालक
थाना प्रभारी अजय गुर्जर ने नाबालिग को समझाइश दी और परिजनों को बताया कि झूठी सूचना देना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। पुलिस ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बालक को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
समाज के लिए सख्त संदेश
झूठी शिकायतें न केवल पुलिस प्रशासन का समय और संसाधन व्यर्थ करती हैं, बल्कि समाज में अनावश्यक भय और भ्रम भी पैदा करती हैं।
सोनकच्छ पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच ने कुछ ही घंटों में सनसनीखेज मामले की सच्चाई उजागर कर दी।




