सोनकच्छ पुलिस की तत्परता से जीता जनविश्वास,
सोनकच्छ।थाना सोनकच्छ में दर्ज अपराध क्रमांक 37/24.01.26, धारा 303(2) बी.एन.एस. के तहत दर्ज बकरा-बकरी चोरी के प्रकरण को पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) जयवीर सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सोनकच्छ दीपा मांडवे के निर्देशन में थाना प्रभारी सोनकच्छ द्वारा विशेष टीम का गठन किया गया।
सीसीटीवी फुटेज और सायबर सेल की मदद से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस टीम ने हाईवे रोड एवं टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। सायबर सेल देवास की तकनीकी सहायता से संदिग्ध वाहन एवं आरोपियों की गतिविधियों को ट्रेस किया गया। निरंतर निगरानी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
दो आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में
राहुल बछाने (22 वर्ष) निवासी पीथमपुर, जिला धार
राहुल पाल (25 वर्ष) निवासी जामनिया, इंदौर
शामिल हैं।
4.31 लाख रुपये का मशरूका जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त
टाटा लोडिंग वाहन क्रमांक एम.पी. 09 एल.क्यू. 4552 (अनुमानित कीमत 4 लाख रुपये),
चोरी की बकरा-बकरी को बेचकर प्राप्त 21 हजार रुपये,
चोरी गया मोबाइल फोन (कीमत लगभग 10 हजार रुपये)
जब्त किया है।
इस प्रकार कुल 4 लाख 31 हजार रुपये का मशरूका बरामद किया गया।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अजय गुर्जर, प्रधान आरक्षक 860 विकास पटेल, 290 कुलदीप, चालक आर. 207 कुलदीप, आरक्षक 603 कपिल वर्मा एवं 1049 सुनील की सक्रिय भूमिका रही।
स्थानीय नागरिकों ने की पुलिस की प्रशंसा
पुलिस की इस त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। स्थानीय नागरिकों ने सोनकच्छ पुलिस की सराहना करते हुए इसे अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
दिनांक 24 जनवरी 2026 को राजस्थान के पशुपालकों के बकरा-बकरी चोरी की घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं थी, बल्कि अस्थायी रूप से रह रहे बाहरी श्रमिकों और पशुपालकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी थी। पशुपालन के सहारे जीवन यापन करने वाले इन लोगों के लिए यह चोरी रोज़ी-रोटी पर सीधा प्रहार थी।
घटना के बाद भय और असंतोष का माहौल बना, किंतु सोनकच्छ पुलिस की तत्परता ने हालात को विश्वास में बदल दिया। आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पूरा मशरूका बरामद होना यह सिद्ध करता है कि कानून की नजर में स्थानीय और बाहरी का कोई भेद नहीं होता।
इस कार्रवाई की सबसे सशक्त तस्वीर तब सामने आई जब राजस्थान से आए पशुपालकों ने थाना परिसर पहुंचकर पुलिस जवानों का हार पहनाकर सम्मान किया। यह दृश्य केवल सम्मान नहीं, बल्कि पुलिस-जन विश्वास की मजबूत कड़ी का प्रतीक बना।
संदेश स्पष्ट है—अपराध चाहे छोटा हो या बड़ा, और पीड़ित चाहे कहीं से भी हो,कानून हर हाल में उसके साथ खड़ा है।




