कलेक्टर साहब के आदेश बेअसर।
सोनकच्छ–गंधर्वपुरी मार्ग पर बेखौफ निकल रहे भारी वाहन। बड़ा हादसा संभव

सोनकच्छ।जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी देवास के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सोनकच्छ–गंधर्वपुरी मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। आदेशों के पालन हेतु लगाए गए लोहे के बैरिकेड किसी अज्ञात भारी वाहन द्वारा तोड़ दिए गए, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार एजेंसी मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने अब तक उन्हें दुरुस्त करवाना जरूरी नहीं समझा। इससे प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुल की सुरक्षा और प्रशासनिक आदेशों के पालन के लिए मार्ग पर लोहे के मजबूत बैरिकेड लगाए गए थे, ताकि 8 फीट से अधिक ऊँचाई वाले एवं सभी भारी वाहनों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। किंतु कुछ ही समय में किसी अज्ञात भारी वाहन ने इन बैरिकेड को तोड़ दिया। बैरिकेड टूटने के बाद मार्ग पूरी तरह खुल गया और भारी वाहनों की आवाजाही बेरोकटोक जारी रही।
गौरतलब है कि सोनकच्छ–गंधर्वपुरी मार्ग के चैनज 9+100 पर स्थित मध्यम पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है। संयुक्त निरीक्षण में पुल के निचले हिस्से में रिटेनिंग एवं रिइन्फोर्समेंट में भारी क्षरण, जंग और संरचनात्मक कमजोरी पाई गई थी। पुल की स्लैब में लगे सरिए पूरी तरह जंग खाकर खराब हो चुके हैं, जिससे उसकी वहन क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों के अनुसार जब भी कोई भारी वाहन इस पुल से गुजरता है, पूरा पुल तेज कंपन करने लगता है, जो किसी बड़े हादसे का स्पष्ट संकेत है। इसके बावजूद प्रतिबंधित श्रेणी के वाहनों का गुजरना न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि आम नागरिकों की जान को सीधे जोखिम में डालने जैसा है।
इस पूरे मामले पर एमपीआरडीसी के प्रबंधक विजय सिंह का कहना है कि “किसी वाहन चालक ने बैरिकेड को तोड़ दिया है।” उन्होंने यह भी बताया कि पुल की क्षतिग्रस्त स्लैब के नीचे मिट्टी भरवाई गई है तथा कलेक्टर को इस पुल पर सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन चालू रखने का प्रस्ताव भेजा गया है।



हालांकि यह बयान कई नए सवाल खड़े करता है। जंग लगे सरियों और कंपन करते पुल पर सिर्फ मिट्टी भर देना क्या सुरक्षा की गारंटी है? यदि पुल सुरक्षित है तो पहले प्रतिबंध क्यों लगाए गए और यदि असुरक्षित है तो सभी वाहनों को अनुमति देने का प्रस्ताव क्यों भेजा गया?
टूटे बैरिकेड, जर्जर पुल और विरोधाभासी निर्णयों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि इस पुल पर कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—प्रशासन की या संबंधित विभाग की?
स्थानीय लोगों की मांग है कि जब तक पुल का पूर्ण पुनर्निर्माण या वैज्ञानिक तरीके से सुदृढ़ीकरण नहीं होता, तब तक भारी वाहनों का इस पुल पर से आवागमन पूरी तरह बंद किया जाए और कलेक्टर के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि किसी अनहोनी से पहले हालात संभाले जा सकें।




