काग़ज़ों में विकास, ज़मीन पर अवैध कॉलोनी!
शाजापुर में शासकीय भूमि और हाई-टेंशन लाइन के नीचे बसावट पर प्रशासन मौन क्यों?

कब जागेगा शाजापुर प्रशासन
शाजापुर। शहर में विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यदि इन दावों को ज़मीनी हकीकत की कसौटी पर परखा जाए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। फाइलों और काग़ज़ों में विकास तेज़ी से दौड़ रहा है, जबकि ज़मीन पर अवैध गतिविधियां खुलेआम फल-फूल रही हैं और कार्रवाई लगभग शून्य नज़र आती है।

मामला शाजापुर शहर के समीप रेलवे पटरी के पास, खेड़ा पहाड़ रोड और कंजा रोड के बीच स्थित क्षेत्र का है, जहां शासकीय भूमि से लगी जमीन पर एक बड़ी कॉलोनी विकसित करने की तैयारी चल रही है। यहां प्लाटिंग, सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचे का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
हाई-टेंशन लाइन के नीचे कॉलोनी, नियमों की खुली अनदेखी
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रस्तावित कॉलोनी के बीचों-बीच उच्च क्षमता की हाई-टेंशन विद्युत लाइन गुजर रही है। नियमानुसार, ऐसी लाइनों के नीचे और आसपास निर्माण कार्य करना प्रतिबंधित माना जाता है, क्योंकि यह सीधे मानव जीवन और सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य को लेकर कोई भय दिखाई देता है और न ही संबंधित विभागों की सख्ती।
स्थानीय स्तर पर यह भी देखा गया है कि यहां जल्द ही कंक्रीट सड़क निर्माण की तैयारी की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि कॉलोनी को स्थायी स्वरूप देने की दिशा में कार्य चल रहा है।
नामांतरण पर रोक, फिर भी रफ्तार में प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है, फिर भी इस क्षेत्र में नामांतरण और रजिस्ट्रियों का कार्य लगातार जारी है। यह स्थिति न केवल नियमों की अनदेखी को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
प्रश्न यह है कि—
चौकाने वाली बात शासकीय भूमि से जुड़ी जमीनों का नामांतरण किस आधार पर किया जा रहा है?
यदि नियमों के अंतर्गत यह सब हो रहा है, तो इसकी सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
और यदि नियमों के विरुद्ध है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
शिकायतें कई बार, कार्रवाई सिर्फ फाइलों तक
इस पूरे मामले को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। नोटिस, पंचनामा और रिपोर्टें भले ही काग़ज़ों में दिखाई देती हों, पर स्थल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पटवारी स्तर पर तैयार किए जाने वाले पंचनामों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या ये पंचनामे वास्तव में मौके पर जाकर बनाए जा रहे हैं, या फिर केवल टेबल पर बैठकर औपचारिकता निभाई जा रही है—
यह जांच का विषय है।
भू-माफिया के हौसले बुलंद, संरक्षण किसका?
शाजापुर में इससे पहले भी भू-माफिया की गतिविधियों को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हर बार कार्रवाई सीमित ही दिखाई दी। खेड़ा पहाड़ रोड और कंजा रोड के बीच विकसित की जा रही यह कॉलोनी उसी सिलसिले की एक और कड़ी प्रतीत होती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
• क्या शासकीय भूमि पर कॉलोनी काटना वैध है?
• क्या हाई-टेंशन लाइन के नीचे रहवासी बसावट की अनुमति दी जा सकती है?
और यदि नहीं, तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रशासन से जवाब की अपेक्षा
शहर के जागरूक नागरिकों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को केवल काग़ज़ों तक सीमित न रखे, बल्कि स्थल निरीक्षण कर नियमों के अनुसार स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस कार्रवाई करे।
यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र भविष्य में किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे सकता है।
अब देखना यह है कि शाजापुर प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।




