नगर के 6 वार्डों के हैंडपंपों एवं ट्यूबवेल का पानी पीने योग्य नहीं नगर परिषद ने लगवाए चेतावनी बोर्ड, पार्षद प्रतिनिधि ने पत्र के जरिए नगर परिषद से मांगा जवाब।
नगर क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। वार्ड क्रमांक 7, 9, 10, 11, 13 और 14 में स्थित हैंडपंप एवं ट्यूबवेल के पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें पीने योग्य नहीं पाया गया। जांच के आधार पर मौके पर पंचनामा तैयार किए गए और नागरिकों को सतर्क करने के लिए हैंडपंप पर चेतावनी सूचना पटल लगा दिए गए।


पंचनामे के अनुसार दिनांक 21 जनवरी 2026 को उक्त हैंडपंप के पानी का परीक्षण कराया गया था। जांच में पानी मानव उपयोग, विशेषकर पेयजल के लिए अनुपयुक्त पाया गया। इसके बाद संबंधित अमले द्वारा मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए कि इन हैंडपंप एवं ट्यूबवेल के पानी का उपयोग पीने के लिए न किया जाए।
स्थानीय नागरिकों में चिंता
हैंडपंप एवं ट्यूबवेल का पानी दूषित पाए जाने के बाद वार्ड वासियों में चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में रहवासी इन्हीं जल स्रोत पर निर्भर थे।
6 वार्डों में दूषित पानी, सूचना पटल लगाए
इधर नगर के वार्ड क्रमांक 7, 9, 10, 11, 13 और 14 में लगे हैंडपंपों का पानी भी पीने योग्य नहीं पाया गया है। नगर परिषद द्वारा कुल 6 जल स्रोत पर सूचना पटल लगाकर जल उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है, जिससे नागरिकों में भय और असमंजस की स्थिति बन गई है।
जल कार्यसमिति अध्यक्ष ने लिखा पत्र, तीखे सवाल
पेयजल की स्थिति को लेकर पार्षद प्रतिनिधि एवं जल कार्यसमिति अध्यक्ष संदीप गुप्ता ने नगर परिषद अधिकारी को एक विस्तृत पत्र लिखकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में कहा गया है कि नगर में पेयजल आपूर्ति एवं शुद्धता को लेकर पारदर्शिता का अभाव है और जनप्रतिनिधियों को समय पर जानकारी नहीं दी गई।
पत्र में प्रमुख रूप से पूछा गया है—
बोरिंग की जांच कब और किस एजेंसी द्वारा कराई गई, इसकी जानकारी जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं दी गई?
फिल्टर प्लांट से वितरित जल वास्तव में शुद्ध और पेययोग्य है या नहीं, इसकी तत्काल पुष्टि की जाए।
पिछले तीन वर्षों में खरीदे गए एलम व ब्लीचिंग पाउडर की गुणवत्ता किस संस्था ने जांची?
फिल्टर प्लांट की सफाई और जांच किन-किन सत्रों में कराई गई, इसका विवरण सार्वजनिक किया जाए।
जल टंकियों के फिल्टर मीडिया को अंतिम बार कब बदला गया, यदि नहीं बदला गया तो कारण स्पष्ट किया जाए।
जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इंदौर व आसपास के क्षेत्रों में दूषित जल से हुई मौतों के बाद पूरे प्रदेश में पेयजल स्रोतों की जांच शुरू हुई, लेकिन सोनकच्छ में सूचना सार्वजनिक होने के बाद ही कार्रवाई होना गंभीर चिंता का विषय है।
अंत में नगर प्रशासन से मांग की गई है कि सभी बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और नगर के नागरिकों को शुद्ध व सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएं।




