कोरे बिलों का किंग! दीपक ट्रेडर्स का मालिक सोहन प्रजापत- क्या पुलिस और टैक्स विभाग इस जालसाज पर आपराधिक कार्रवाई करेंगे?
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इसकी पुलिस में शिकायत भी हुई है, शिकायतकर्ता को भी मिल रही है शिकायत वापस लेने की धमकिया
देवास/चापड़ा। इंदौर रोड चापड़ा स्थित दीपक ट्रेडर्स—जिसके बाहर बोर्ड इसे सीमेंट, सरिया और ईंट का व्यापारी बताता है—असल में कोरे बिलों और संगठित गोरखधंधे का अड्डा बनता दिख रहा है। मीडिया जांच में ऐसे भारी और पुख्ता सबूत मिले हैं, जो सीधे-सीधे GST, इनकम टैक्स और शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचाने की ओर इशारा करते हैं।
अब सवाल यह है—क्या पुलिस और टैक्स विभाग इस जालसाज पर आपराधिक कार्रवाई करेंगे?
बोर्ड कुछ और, अंदर कुछ और—आपराधिक जालसाजी का खुलासा
दीपक ट्रेडर्स के अंदर चल रहा है कोरे बिलों का खेल, टैक्स चोरी की योजना का भंडाफोड़
दुकान के बाहर कंस्ट्रक्शन मटेरियल का साइनबोर्ड, लेकिन अंदर चल रहा है कागज़ों का खेल, जहां बिना माल के कोरे बिल जारी कर शासन को लाखों-करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
क्या इस सुनियोजित आपराधिक जालसाजी पर पुलिस कार्रवाई होगी, या मामला विभागीय नोटिसों तक सीमित रह जाएगा?
“बिल मेरी दुकान के हैं, पर क्या बिका—मुझे नहीं पता”
सोहन प्रजापत का चौकाने वाला बयान—आपराधिक व्यापार की स्वीकारोक्ति?
मीडिया द्वारा पूछे गए विशेष बिल नंबर और तारीख पर दुकानदार ने कहा—
“बिल मेरी दुकान के हैं, लेकिन मुझे जानकारी नहीं कि इनमें क्या और कितने का सामान बेचा गया।”
यह बयान सीधे-सीधे अपने ही व्यापार के बिलों की जानकारी न होना और टैक्स चोरी में मिलीभगत का संकेत देता है।
क्या पुलिस इस स्वीकारोक्ति के आधार पर आपराधिक कार्रवाई करेगी?
GST पर सबसे विस्फोटक बयान—“पैसे दो, सब हो जाता है”
उप-शीर्षक: आपराधिक खेल में बेखौफ दुकान मालिक, GST और इनकम टैक्स की अनदेखी
जब GST रिटर्न के सवाल किए गए, तो दुकानदार ने कहा—
“GST में पैसे दो, सब काम हो जाता है।”
यह कथन सिर्फ व्यापारिक बेईमानी नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध और टैक्स चोरी का खुला प्रमाण है।
क्या पुलिस और टैक्स विभाग इस जालसाज के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करेंगे?
अब उठते हैं बड़े और सीधे सवाल
कितना नुकसान, कितनी चोरी और क्या होगी आपराधिक कार्रवाई?
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कितने कोरे बिल बेचे गए?
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शासन को कितने लाख या करोड़ का नुकसान हुआ?
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क्या इस खेल में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी है?
अब निगाहें टिकी हैं देवास कलेक्टर, GST विभाग, इनकम टैक्स विभाग और पुलिस प्रशासन पर।
सबसे बड़ा सवाल
क्या सोहन प्रजापत पर इस जालसाजी के लिए आपराधिक कार्रवाई होगी, या मामला फिर “सेट” होकर दबा दिया जाएगा?
यदि इस जालसाज पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि कोरे बिल बेचने वाले बेखौफ हैं और कानून सिर्फ दिखावे तक सीमित है।
अब फैसला कानून और पुलिस का—कौन जीतेगा व्यवस्था या जालसाज?




