‘मुख्यमंत्री जी, मुझे भारत–न्यूजीलैंड का मैच दिखा दीजिए…’

दिव्यांग की एक अपील पर पसीजा सीएम डॉ. मोहन यादव का दिल, वीडियो देखते ही लिया फैसला, पल में पूरी की मुराद
इंदौर | 18 जनवरी 2026 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर संवेदनशीलता और मानवीय सरोकारों की मिसाल पेश की है। एक दिव्यांग युवक की मासूम अपील पर मुख्यमंत्री का दिल पसीज गया और उन्होंने बिना देर किए उसकी सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी।
दरअसल, उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बमनापानी निवासी दिव्यांग युवक अभिषेक सोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से मुख्यमंत्री से भावुक अपील की थी। उसने कहा था कि उसे क्रिकेट बेहद पसंद है और उसकी ख्वाहिश है कि वह भारत–न्यूजीलैंड के बीच इंदौर में हो रहे वनडे मैच को स्टेडियम में जाकर लाइव देखे, लेकिन टिकट नहीं मिल पा रही।
वीडियो मुख्यमंत्री तक पहुंचते ही सीएम डॉ. मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लिया और अभिषेक के लिए मैच के टिकट की व्यवस्था करवा दी। मुख्यमंत्री की इस त्वरित संवेदनशील पहल से दिव्यांग युवक की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे।
टीम इंडिया की जर्सी में स्टेडियम पहुंचा अभिषेक
टिकट मिलते ही दिव्यांग अभिषेक सोनी टीम इंडिया की जर्सी पहनकर इंदौर स्टेडियम पहुंचा। उसने खुशी-खुशी मैच टिकट दिखाते हुए कहा—
“मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का दिल से धन्यवाद करता हूं। उन्होंने मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी मुझे दे दी।”
वीडियो में कही थी दिल की बात
अभिषेक ने अपने वीडियो संदेश में कहा था—
“मुख्यमंत्री जी प्रणाम। मेरा नाम अभिषेक सोनी है। मैं दिव्यांग हूं। क्रिकेट मेरा जुनून है। भारत–न्यूजीलैंड का मैच इंदौर में हो रहा है, जिसे मैं मैदान से देखना चाहता हूं, लेकिन टिकट नहीं मिल रही। आपसे निवेदन है कि मेरी मदद करें।”
मुख्यमंत्री ने इस अपील को सिर्फ सुना ही नहीं, बल्कि तुरंत अमल में लाकर भरोसे को साकार कर दिया।
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता बनी पहचान
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जब उन्होंने आमजन से सीधा संवाद कर मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखा।
कभी वे आम आदमी की तरह यूपीआई से बाजार में खरीदारी करते दिखे, तो कभी सड़क किनारे जनता के साथ चाय पीते नजर आए। एक बार भुट्टा खरीदते हुए बच्चे को दुलारने की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।
मुख्यमंत्री स्वयं कह चुके हैं—
“मुख्यमंत्री आवास मेरा नहीं, जनता का आवास है।”




