ई-टोकन फेल, ठंड में किसान बेहाल, यूरिया टोकन के लिए सोनकच्छ में कतारें, ‘डिजिटल सुविधा’ सिर्फ दावों तक सीमित

सोनकच्छ। किसानों को “घर बैठे सुविधा” देने का दावा करने वाली ई-टोकन उर्वरक व्यवस्था सोनकच्छ में पूरी तरह फेल नजर आ रही है। रबी फसलों के लिए अत्यंत आवश्यक यूरिया खाद के लिए किसान कड़ाके की ठंड में तड़के घर से निकलकर सोनकच्छ पहुंचने को मजबूर हैं। ई-टोकन व्यवस्था अब तक लागू न होने से किसान घंटों कतारों में खड़े होकर टोकन और यूरिया के लिए भटकते दिखाई दे रहे हैं।
सुबह की ठिठुरन भरी ठंड में ग्रामीण अंचलों से आए किसान व्यवस्था की अव्यवस्था का दर्द बयां कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि डिजिटल सिस्टम के नाम पर न तो उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि समय पर यूरिया न मिलने से रबी फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि बिना जमीनी तैयारी के लागू की गई ई-टोकन प्रणाली केवल कागजी साबित हो रही है। सहायता केंद्रों की कमी, सूचनाओं का अभाव और वितरण में अव्यवस्था ने किसानों की परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं। ठंड, समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान—तीनों का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।
इस संबंध में कृषि विभाग के टी. आर. परिहार ने बताया कि सोनकच्छ क्षेत्र में ई-टोकन व्यवस्था शुरू करने की प्रक्रिया जारी है और 15 जनवरी तक इसे लागू कर दिया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि तब तक यूरिया के लिए जूझ रहे किसानों को क्या राहत मिलेगी, या वे इसी तरह ठंड में कतारों में खड़े रहने को मजबूर रहेंगे?
अब किसानों की मांग है कि ई-टोकन व्यवस्था लागू होने तक तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, अतिरिक्त वितरण केंद्र खोले जाएं और यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि डिजिटल योजनाओं की कीमत किसानों को न चुकानी पड़े।




