सोनकच्छ नगर परिषद कुंभकर्णी नींद में।फिल्टर प्लांट परिसर में ही बह रहा नाली का गंदा पानी।
इंदौर के भागीरथपुरा में जनहानि के बाद भीनहीं खुली सोनकच्छ नगर परिषद के जिम्मेदारों की नींद में

सोनकच्छ।नगरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा करने वाली सोनकच्छ नगर परिषद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर के फिल्टर प्लांट परिसर में ही घरों की नालियों का गंदा पानी खुलेआम बहता पाया गया, जो सीधे तौर पर पेयजल सुरक्षा पर गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है।
यह स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है, जब हाल ही में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से जनहानि जैसी हृदयविदारक घटना सामने आ चुकी है। इसके बावजूद सोनकच्छ नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए नजर आ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, फिल्टर प्लांट के सामने और आसपास के घरों से निकलने वाला नाली का गंदा पानी बिना किसी रोक-टोक के प्लांट परिसर में प्रवेश कर रहा है। यही प्लांट नगर के 18 हजार से अधिक नागरिकों को पीने के पानी की आपूर्ति करता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस परिसर में गंदा पानी बह रहा हो, वहां से निकलने वाला पानी कितना सुरक्षित हो सकता है।
नगर के जागरूक नागरिक राम बघेल एवं भावेश मेहता ने कहा कि इंदौर की घटना से सबक लेने के बजाय सोनकच्छ में प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। यदि समय रहते गंदे पानी का रास्ता नहीं रोका गया और पेयजल की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो यहां भी इंदौर जैसी त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।
नागरिकों का कहना है कि यह लापरवाही केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
नागरिकों की मांग
फिल्टर प्लांट परिसर में नाली के गंदे पानी के प्रवेश को तत्काल बंद किया जाए
पेयजल की स्वतंत्र व पारदर्शी जांच कराई जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सोनकच्छ में पेयजल संकट केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य आपदा में बदल सकता है।




