कन्नौद में सागौन चोर गैंग पर पुलिस का शिकंजा, वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

देवास/कन्नौद, 26 मार्च 2026। जहां एक ओर कन्नौद पुलिस रात्रि गश्त में मुस्तैदी दिखाते हुए सागौन चोर गैंग के सदस्यों को धर दबोच रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद के निर्देश पर चल रही सख्त चेकिंग के दौरान कन्नौद पुलिस ने न केवल सागौन तस्करों को पकड़ा, बल्कि उनके कब्जे से वृक्ष काटने के औजार, शिकार सामग्री और दो वन्य प्राणी (खरगोश) भी बरामद किए। यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सौम्या जैन और एसडीओपी आदित्य तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी तहजीब काजी की टीम ने अंजाम दी।
सूचना के आधार पर पुलिस ने जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर दो आरोपियों—लाडखां और मकबूल—को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से न सिर्फ अवैध लकड़ी कटाई के औजार मिले, बल्कि शिकार किए गए वन्य जीव भी बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने विधिवत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जब्त सामग्री वन विभाग को सौंप दी।
पुलिस बनी हीरो, वन विभाग पर सवालों की बौछार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जंगल में लंबे समय से सागौन की अवैध कटाई और शिकार का खेल चल रहा था, वहां वन विभाग आखिर कर क्या रहा था?
क्या वन विभाग की गश्ती टीम केवल कागजों में ही सक्रिय है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हैं?
या फिर “सेटिंग” के चलते जंगलों की हरियाली पर आरी चलाई जा रही है?
जंगलों में लंबे समय से अवैध गतिविधियां जारी हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। ऐसे में पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल अपराधियों की कमर तोड़ी है, बल्कि वन विभाग की निष्क्रियता को भी उजागर कर दिया है।
सराहनीय रही पुलिस टीम की भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी तहजीब काजी, उपनिरीक्षक दीपक भोण्डे, विलियम खलको, आरक्षक देवेन्द्र और कन्हैयालाल की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने जोखिम उठाकर जंगल में घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ा।
अब जवाब दे वन विभाग
जब पुलिस रात में जंगल में घुसकर अपराधियों को पकड़ सकती है, तो वन विभाग दिन में भी क्यों नाकाम साबित हो रहा है?
क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी केवल दफ्तरों में आराम फरमा रहे हैं? जबकि यहां SDO का भी कार्यालय है।
कन्नौद की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है— अगर नीयत साफ हो, तो जंगल बचाना मुश्किल नहीं।
अब देखना होगा कि वन विभाग अपनी कार्यप्रणाली सुधारता है या फिर यूं ही सवालों के घेरे में बना रहता है।




