दरवाज़े पर खड़ा बचपन, सोनकच्छ में मासूम भीख माँगने को मजबूर,
बाल संरक्षण तंत्र सिर्फ काग़ज़ों में

सोनकच्छ।सोनकच्छ क्षेत्र में बच्चों का घरों के दरवाज़ों, हाट बाजारों और मेलों में भीख माँगना बाल संरक्षण व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर कर रहा है। जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, वे आज कटोरा या देवी-देवताओं की तस्वीरें थामे लोगों से मदद की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं।
हाट बाजार और मेलों में खुलेआम भिक्षावृत्ति
स्थानीय नागरिकों के अनुसार शनिवार को लगने वाले हाट बाजारों में छोटे-छोटे बच्चे देवी-देवताओं की फोटो या छोटी मूर्तियाँ लेकर दुकानों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भीख माँगते नजर आते हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
योजनाएँ मौजूद, लेकिन ज़मीन पर असर नहीं
बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की है। विभाग के अंतर्गत चाइल्ड लाइन, बाल संरक्षण इकाइयाँ और विभिन्न योजनाएँ संचालित हैं, लेकिन सोनकच्छ क्षेत्र में इनका लाभ ज़रूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुँच पा रहा है।
न पहचान, न पुनर्वास
सबसे गंभीर पहलू यह है कि भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों की न तो कोई आधिकारिक पहचान सूची सामने आई है और न ही यह जानकारी कि कितने बच्चों को स्कूल या किसी पुनर्वास योजना से जोड़ा गया। इससे विभागीय निगरानी और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियमों की अनदेखी
बाल अधिकारों से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को तत्काल संरक्षण, काउंसलिंग और शिक्षा से जोड़ना अनिवार्य है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों का भीख माँगना यह दर्शाता है कि बाल संरक्षण तंत्र केवल काग़ज़ों तक सीमित रह गया है।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि हाट बाजारों और मेलों में नियमित निगरानी की जाए, ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें भिक्षावृत्ति से बाहर निकालते हुए शिक्षा और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बचपन को सड़कों और दरवाज़ों से वापस स्कूल तक पहुँचाया जा सके।
इस संबंध मे विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाकर महिला बाल विकास विभाग एवं चाइल्ड लाइन की मदद से भिक्षा वृत्ति की रोकथाम की जाएगी।
फिरदौस शेख
परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग सोनकच्छ




