सृष्टि के देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई

कांटाफोड़। सुदामापुरी में सुतार समाज द्वारा सृष्टि के रचयिता एवं देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जन्म जयंती श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर समाजजनों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर समाज की उन्नति, सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा भजन-कीर्तन एवं आरती का आयोजन हुआ। विशेष आकर्षण के रूप में भगवान विश्वकर्मा को 56 भोग अर्पित किए गए, जिनमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन, मिठाइयाँ एवं फल शामिल रहे। 56 भोग के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
समाज के वरिष्ठजनों ने भगवान विश्वकर्मा के जीवन, कर्म और सृजनशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा श्रम, कौशल और निर्माण के प्रतीक हैं। उनसे प्रेरणा लेकर समाज को ईमानदारी और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, युवा एवं महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रसादी वितरण किया गया तथा आपसी शुभकामनाओं के साथ आयोजन का समापन हुआ।




