सोनकच्छ में विशाल हिन्दू सम्मेलन एवं समरसता भोज सम्पन्न
सनातन चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रभाव पर हुआ व्यापक मंथन
सोनकच्छ में विशाल हिन्दू सम्मेलन एवं समरसता भोज सम्पन्न

सनातन चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रभाव पर हुआ व्यापक मंथन
सोनकच्छ।
रविवार को सोनकच्छ में विशाल हिन्दू सम्मेलन एवं समरसता भोज का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक चेतना को सशक्त करना रहा। सम्मेलन में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबियों की सहभागिता रही।
यह सम्मेलन महाराणा प्रताप एवं छत्रपति शिवाजी संयुक्त बस्ती के तत्वावधान में कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें जाति-पात से ऊपर उठकर “हिन्दू–हिन्दू भाई-भाई” का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती (महामंडलेश्वर, जम्मू-कश्मीर) ने की।

विशेष अतिथि के रूप में महंत लवचंद दास (श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर), मात्र शक्ति डॉ वंदना जोशी तथा प्रकाश शास्त्री (प्रांतीय संघ चालक) मंचासीन रहे।
सम्मेलन के अंतर्गत गीताभवन से एक सुसज्जित रथ पर शोभायात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कार्यक्रम स्थल पहुँची। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।
मुख्य अतिथि स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि देशभर में हिन्दू चेतना के लिए ऐसे सम्मेलन आवश्यक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि “धर्म है तो देश है, समाज है और परिवार है। बिना धर्म के जीवन की कल्पना संभव नहीं।” उन्होंने धर्मांतरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सनातनी समाज को सजग रहने का आह्वान किया तथा अपनी संस्कृति पर गर्व करने की बात कही।

महंत लवचन्द दास जी महाराज ने लोगो को संदेश दिया कि
“हम दो हमारे दो नहीं, अब हम दो सौ होना चाहिए”
महंत लवचन्द दास उदासीन ने हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए समाज को स्पष्ट और सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब “हम दो हमारे दो” जैसी सोच से बाहर निकलकर “हम दो से दो सौ” की भावना को अपनाना होगा।
महंत लवचन्द दास जी ने कहा कि सनातन समाज की शक्ति उसकी संख्या, एकता और संस्कारों में निहित है। यदि समाज को सुरक्षित, सशक्त और संगठित रखना है तो जनसंख्या संतुलन, सामाजिक जागरूकता और धर्म के प्रति प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को अपनाते हुए आने वाली पीढ़ी को संस्कारित करें, ताकि समाज मजबूत बने और राष्ट्र सशक्त हो। उनके इस उद्बोधन पर सम्मेलन में मौजूद श्रद्धालुओं ने समर्थन व्यक्त किया और इसे सामाजिक चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण संदेश बताया।
अन्य वक्ताओं ने भी सनातन संस्कृति, धार्मिक एकता, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रभाव पर सारगर्भित विचार रखे। कार्यक्रम में सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना एवं लव-कुश आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई, वहीं हैप्पी पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने श्रीराम दरबार पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर किया।वहीं क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने भी सम्मेलन में सहभागिता कर आयोजन को गरिमा प्रदान की।
सम्मेलन का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। समापन से पूर्व सामूहिक समरसता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन भूपेन्द्र गुप्ता एवं नरेन्द्र मेहता ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन नरेन्द्र छापरवाल द्वारा किया गया। आयोजन को लेकर नगर में उत्साहपूर्ण और सकारात्मक वातावरण देखने को मिला।




