भागवत कथा जीव को मोक्ष का मार्ग दिखाती है, पं. दिलीप शास्त्री
कथा में पहुंचे क्षेत्रीय विधायक, हुआ वक्ता का सम्मान

कथा में पहुंचे क्षेत्रीय विधायक, हुआ वक्ता का सम्मान
कांटाफोड़। संसार में मनुष्य का वास्तविक संबंध केवल ईश्वर से है, जीव-जगत से नहीं। जीव तो स्वयं ईश्वर का अंश है। “भगवान मेरे हैं और मैं भगवान का हूँ”— इस भाव को जो जीव हृदय से स्वीकार कर ले, वही सच्चा ज्ञानी होता है। जीव को चाहिए कि वह भगवान को अपने हृदय में बसाए।
यह विचार पूर्व विधायक गणपत पटेल के निवास स्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं शतचंडी यज्ञ के दौरान भागवत कथा वाचक पं. दिलीप शास्त्री (अयोध्या वाले) ने व्यक्त किए।
भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भव्य एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। साथ ही माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के वात्सल्यपूर्ण चरित्र का सुंदर चित्रण किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा में विशेष रूप से क्षेत्रीय विधायक मुरली भंवरा एवं कन्नौद-खातेगांव विधायक आशीष शर्मा कथा स्थल पर पहुंचे। दोनों विधायकों ने भागवत कथा वाचक पं. दिलीप शास्त्री का पुष्पहार एवं शाल से सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं। पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है और क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है।




