नाला सफाई करने से सफाई कर्मचारियों ने किया इनकार, सीएमओ ने दी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

नाला सफाई करने से सफाई कर्मचारियों ने किया इनकार, सीएमओ ने दी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
सोनकच्छ। नगर के डाक बंगला रोड क्षेत्र में महीनों से नालियों की सफाई नहीं होने से हालात बेहद खराब हो चुके हैं। नालियों में जमी गाद, गंदगी से पूरा इलाका बदबू की चपेट में है। परेशान रहवासियों ने मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, तब कहीं जाकर नगर परिषद प्रशासन हरकत में आया।
शिकायत के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमरदास सेनानी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण में नालियों पर अतिक्रमण सामने आया, जिस पर संबंधित दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए। प्रशासन के दबाव में दुकानदारों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण तो हटा लिया, लेकिन इसके बाद नाला सफाई का असली पेंच सामने आ गया।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि डाक बंगला रोड पर लगभग 200 से 250 मीटर लंबे नाले में भारी मात्रा में गाद जमा है, जिसकी तत्काल निकासी जरूरी है। नगर परिषद ने सफाई कर्मचारियों को गाद निकालने और नाला साफ करने के निर्देश दिए, लेकिन कर्मचारियों ने काम करने से साफ इनकार कर दिया।
सीएमओ के अनुसार नगर परिषद में कुल 83 सफाई कर्मचारी पदस्थ हैं, जिनमें से 12 कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर नाले की गाद निकालने और सफाई करने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे। साथ ही सफाई दरोगा अनिल धौलपुरे को मौके पर तैनात रहकर काम कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन आदेशों की खुलेआम अवहेलना की गई।
मामला यहीं नहीं रुका। 15 से 20 सफाई कर्मचारी नगर परिषद कार्यालय पहुंच गए और बकाया वेतन की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया, जिससे कार्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सीएमओ को ‘सलाह’ और ताला लगाने की बात
हंगामे के दौरान कर्मचारी नेता रोहित धौलपुरे ने बहस के बीच सीएमओ को यह “सलाह” दे डाली कि यदि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, तो नाला सफाई का काम ठेका पद्धति से या बाहर के कर्मचारियों से करवा लिया जाए।
इतना ही नहीं, बहस के दौरान नगर परिषद में ताला लगाने की बात भी कह दी गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
स्थिति बिगड़ते देख सीएमओ ने कड़ा और सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि
“नगर की सफाई व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जो कर्मचारी शासकीय आदेश का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि सफाई दरोगा अनिल धौलपुरे की भूमिका की जांच की जा रही है और यदि लापरवाही या आदेशों की अनदेखी पाई गई, तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं सफाई कर्मचारियों का कहना है कि लगातार वेतन भुगतान में देरी से वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि दो माह का बकाया वेतन तुरंत दे दिया जाए, तो वे नाला सफाई और गाद निकासी का कार्य शुरू कर देंगे।
नगर परिषद प्रशासन के अनुसार परिषद में वर्तमान में कुल 83 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि नियमों के अनुसार केवल 33 दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारियों की ही आवश्यकता है। निर्धारित मानक से कहीं अधिक कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर भी अब विवाद सामने आ गया है। प्रशासन का मानना है कि अतिरिक्त कर्मचारियों के कारण न केवल आर्थिक भार बढ़ रहा है, बल्कि कार्य विभाजन और जवाबदेही को लेकर भी लगातार समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
इस स्थिति ने नगर परिषद और सफाई कर्मचारियों के बीच चल रहे टकराव को और जटिल बना दिया है, जिससे साफ-सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।फिलहाल नगर परिषद प्रशासन और सफाई कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। यदि जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा।




