ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बना कड़कनाथ मुर्गीपालन
खोरियाएमा, विकासखंड मो. बड़ोदिया में अनुसूचित जाति के मुर्गीपालक कृषकों हेतु कुकुट पालन

ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बना कड़कनाथ मुर्गीपालन
कृषि विज्ञान केन्द्र शाजापुर द्वारा अनुसूचित जाति के कृषकों को मिला उद्यमिता प्रशिक्षण
शाजापुर।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र, शाजापुर द्वारा 16 जनवरी 2026 को ग्राम खोरियाएमा, विकासखंड मो. बड़ोदिया में अनुसूचित जाति के मुर्गीपालक कृषकों हेतु कुकुट पालन विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन श्रीमती अनिता हेमराज पाटीदार, सरपंच खोरियाएमा के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को कड़कनाथ मुर्गीपालन को ग्रामीण उद्यमिता के रूप में अपनाकर आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसमें कड़कनाथ मुर्गियों के पालन-पोषण, आवास प्रबंधन, संतुलित आहार, रोग नियंत्रण एवं टीकाकरण पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. जी. आर. अंबावतिया ने कड़कनाथ नस्ल की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह नस्ल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है। उन्होंने पोषण संबंधी समस्याओं, प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान की जानकारी दी। साथ ही किसानों को जायद मौसम में औषधीय एवं कद्दूवर्गीय फसलों—करेला, लौकी, तुरई, तरबूज एवं खरबूज—की खेती अपनाने की सलाह दी।
डॉ. डी. के. तिवारी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कड़कनाथ मुर्गीपालन हेतु उपयुक्त स्थान चयन, शेड एवं संरचना निर्माण की जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. मुकेश सिंह ने कड़कनाथ मुर्गियों के चारा, भोजन एवं पोषण तत्वों की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने रबी फसलों में चना एवं मसूर की फसल में माहू कीट नियंत्रण के लिए इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की वैज्ञानिक सलाह दी।
पशुपालन विभाग के डॉ. राजकुमार गामी ने कड़कनाथ मुर्गियों में होने वाले प्रमुख रोग, टीकाकरण कार्यक्रम, सर्दी के मौसम में ठंड से बचाव एवं समुचित देखरेख की जानकारी देकर कृषकों की शंकाओं का समाधान किया।
मुख्य अतिथि श्रीमती अनिता हेमराज पाटीदार ने महिला कृषकों से आह्वान किया कि वे स्वरोजगार के रूप में मुर्गीपालन को अपनाएं तथा अपने घरों के आसपास खाली स्थानों में पोषण वाटिका विकसित करें, जिससे परिवार को वर्ष भर पोषणयुक्त एवं रसायनमुक्त हरी सब्जियां उपलब्ध हो सकें।
कार्यक्रम में अनुसूचित जाति के 100 से अधिक कृषकों एवं महिला कृषकों ने सक्रिय सहभागिता की। अंत में उपस्थित कृषकों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया।
(वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख)
कृषि विज्ञान केन्द्र, शाजापुर




