सोनकच्छअनाज मंडी में चारों ओर चद्दर, जालियों का अतिक्रमण— और मंडी सचिव ‘नोटिस राज’ में मगन! किसान–कर्मचारी परेशान, प्रशासन बेखबर

सोनकच्छअनाज मंडी में चारों ओर चद्दर, जालियों का अतिक्रमण— और मंडी सचिव ‘नोटिस राज’ में मगन!
किसान–कर्मचारी परेशान, प्रशासन बेखबर
सोनकच्छ। सोनकच्छ मंडी की हालत इन दिनों ऐसी हो गई है कि गोदाम खाली और रास्ते अनाज से भरे पड़े हैं। नियमों के मुताबिक जहां अनाज को सुरक्षित गोदामों में होना चाहिए, वहां व्यापारियों ने खुले परिसर में ढेर लगा दिए और चारों ओर चद्दर,जालियां रखकर अस्थायी अतिक्रमण को स्थायी कब्जे में बदल दिया। एक व्यापारी ने किया, दूसरे ने देखा-देखी शुरू कर दिया—नतीजा यह कि पूरी मंडी अब संकरी गलियों की भूलभुलैया बन चुकी है।
किसान फंसे, ट्रैक्टर अटके, रोज़ का झगड़ा
किसानों के ट्रैक्टर, लोडिंग वाहन और यहां तक कि मंडी परिसर में संचालित अन्य शासकीय कार्यालयों तक जाने के रास्ते भी अवरुद्ध हो चुके हैं। वाहन निकालने को लेकर मजदूरों, व्यापारियों और चालकों के बीच रोज़ाना तकरार आम बात हो गई है। कभी भी यह विवाद बड़ा रूप ले सकता है, लेकिन मंडी प्रशासन को मानो इसकी कोई फिक्र ही नहीं।
सब आंखों के सामने… फिर भी कार्रवाई शून्य
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा अतिक्रमण मंडी प्रशासन की आंखों के सामने खड़ा हुआ है। जालियां लगीं, रास्ते बंद हुए, किसान परेशान हुए—लेकिन कार्रवाई?लगभग शून्य।
बी-पैक्स प्रबंधक देवेन्द्र सेंधव ने बताया कि वे इस अतिक्रमण को लेकर पहले भी शिकायत कर चुके हैं और अब उच्च अधिकारियों को आवेदन दिया हैं। हालात इतने बिगड़े कि एक दिन रास्ता खुलवाने के लिए डायल-112 पुलिस बुलानी पड़ी—तब जाकर प्रशासन की “नींद” थोड़ी देर को टूटी।
मंडी सचिव का जवाब: वही पुराना राग
जब सवाल उठा तो मंडी सचिव की ओर से वही घिसा-पिटा जवाब सामने आया—
“नोटिस दे दिए हैं।”
“अतिक्रमण हटवाने के लिए 24 दिसंबर को मंडी के चार व्यापारियों को नोटिस दिए गए हैं। तीन दिन का समय दिया गया है। जवाब आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।”
— रायसिंह मेवाड़ा
प्रभारी मंडी सचिव
क्या नोटिस की स्याही सूखते ही अतिक्रमण हट जाएगा,या मंडी यूं ही व्यापारियों की बपौती बनी रहेगी और सचिव साहब फाइलों में ही समाधान ढूंढते रहेंगे?




